किन्तु जैसा कि डॉ0 रामविलास शर्मा ने कहा है-
किन्तु जैसा कि डॉ0 रामविलास शर्मा ने कहा है- ”बोलियां ही हिन्दी की सबसे बड़ी शक्ति है। एक हिन्दी वह है जो अपने मानक रूप में अपनी सरलता और नियमबद्धता के कारण राष्ट्रीय और क्षेत्रीय से लेकर अंतर्राष्ट्रीय भाषा तक है। दूसरी हिन्दी वह है जो आंचलिक और
क्षे़त्रीय प्रकार की है। यह हिन्दी मानक हिन्दी के लिए शब्दो और प्रयोगो का अक्षय भंडार है। मानक हिन्दी का वही अंश गृहीत होता है जो इसके राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बोधगम्य होने में बाधक नहीं है। नमनीयता और अनुशासनबद्धता ऐसे परस्पर विरोधी ध्रुव है